जर्मनी को रक्षा सह-विकास का न्योता, भारत ने साझेदारी मजबूत करने पर दिया जोर
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने म्यूनिख में जर्मन कंपनियों को भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए आमंत्रित करते हुए रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया।
आत्मनिर्भर भारत और रीआर्म यूरोप पहल के तहत उन्नत रक्षा तकनीक, एआई सिस्टम और समुद्री सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई।
भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए निवेश, तकनीकी साझेदारी और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
Delhi/ Rajnath Singh ने Germany के उद्योग जगत को भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए आमंत्रित करते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भरोसेमंद साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। 23 अप्रैल 2026 को Munich में आयोजित रक्षा निवेशक शिखर सम्मेलन में उन्होंने भारत को एक स्थिर, भरोसेमंद और उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में देशों को अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहा है, जो स्थिर नीतियों, मजबूत आर्थिक आधार और कुशल कार्यबल के साथ दीर्घकालिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
Narendra Modi के नेतृत्व में भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने कहा कि यह यात्रा स्पष्ट दृष्टि, नीति समर्थन और 1.4 अरब नागरिकों की आकांक्षाओं से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
रक्षा मंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘रीआर्म यूरोप’ पहल के बीच संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियां जर्मन उद्योगों के साथ उन्नत रडार, सेंसर तकनीक, एआई-आधारित मानवरहित सिस्टम और समुद्री उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ अलग-थलग होना नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी के माध्यम से देश में डिजाइन, विकास और उत्पादन को बढ़ावा देना है।
भारत के रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से संचालित होता है, जिससे नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बल मिलता है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में विकसित स्टार्टअप हब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तकनीकी समाधान तैयार कर रहे हैं।
श्री सिंह ने जर्मन उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार ने निवेश को आकर्षित करने के लिए पारदर्शी और निवेशक-हितैषी नीतियां लागू की हैं। उन्होंने बताया कि नियामक ढांचे को मजबूत किया गया है और बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है।
अपने दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने कील स्थित टीकेएमएस पनडुब्बी निर्माण संयंत्र का भी दौरा किया, जहां उन्होंने समुद्री सुरक्षा और नौसेना तकनीक में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इससे पहले बर्लिन में उन्होंने अपने जर्मन समकक्ष Boris Pistorius के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग के रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन प्रशिक्षण से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। यह दौरा भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को नई दिशा देने और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।